यकीन नहीं हो रहा था…What I have heard. I was depressed and in pain like my heart was broken. मतलब ऐसा क्यों होता है कि frustration में मुंह से या तो इंग्लिश निकलती है या गाली। वैसे यह होगा मुझे किसी ने बहुत पहले बता दिया था, लेकिन मैं माना नहीं, कैसे मानता मैं कलाकार था और मुझसे ज्यादा जानकार कोई और…hunnnnnnn!

Shuruwat- The beginning!

कुछ चीज़ें जरूरी होती है उसे लॉजिकल कहते हैं और कुछ चीज़ें जरूरी नहीं होती है उसे दिल-लॉजिकल कहते हैं। वैसे यह दिल-लॉजिकल वाला फंडा भी किसी क्रिएटिव महापुरुष ने ही दिया है- सही वाले महापुरुष, वो अंदाज़ अपना अपना वाले मत समझना।
तो अब आगे बढ़ते हैं, वैसे इस बकवास से Header के बिना भी कहानी आगे बढ़ सकती थी लेकिन फिर ”पन” में कमी आ जाती और मेरे पैशन पर सवाल भी खड़ा हो सकता था। But अब जैसा लग रहा है कि माहौल बन गया है, सीन सेट हो गया है…तो शुरू करते हैं कहानी।

Shaadi– Eligibility pata karne wala samahroh!

अमूमन पारिवारिक समाहरोह में इज़्ज़त उतारने की प्रथा होती है, और इस बार मेरी बारी थी: हेल्लो बेटा, एक अंकल ने कहा और मेरा प्रणाम कुछ सहमा हुआ था। परिणाम से मैं वाकिफ था पर जोश उसे बदलने का था। तुम्हें पता चला न कि शर्मा जी (काल्पनिक नाम) का लड़का इंजीनियर बन गया है और मस्त सेटल हो गया है। मैंने बोला: हाँ, लेकिन अंकल को मेरी हाँ सुन के मज़ा नहीं आया और कोई मायूसी भी नहीं दिखी, तो फिर उन्होंने कहा: अरे मैं तो बताना ही भूल गया, वो अपने वर्मा जी (बदला हुआ नाम) के छोटे बेटे ने तो कमाल ही कर दिया, इस साल मेडिकल एंट्रेंस निकल ली उसने. मैंने कहा … हाँ अंकल. अंकल ने कहा: हाँ हाँ (बात में जोर डाला गया ताकि मैं सोचने पर विवश हो जाऊँ), लेकिन अंकल को लगा की वो हार रहें है और तुंरंत उन्होंने एक सॉलिड कटाक्ष किया….और वैसे तुम तो जानते ही होगे बेटा…बचपन में शायद दोस्त था न तुम्हारा, साथ ही में क्रिकेट खेलते थे न दोनों। इस बात से अंदाज़ा लग गया था कि अंकल आज पूरे मूड में है। पर मैं भी खुद को धोनी समझ कर डटा हुआ था।
फिर अंकल ने रुख बदला और पूछा सबसे एहम सवाल। कई दफा यह सवाल पूछा जा चूका है, भारतीय इतिहास में…और लोग इसी सवाल का सॉलिड जवाब देने के लिए UPSC की तैयारी करते हैं।
अंकल ने कहा- और बताओ बेटा…क्या करते हो तुम…मैंने सलीके से जवाब दिया “जी मैं पेंटर हूँ”। अच्छा तो क्या पेंट करते हो बेटा। मैंने कहा: कुछ भी, लेकिन मुझे न खास तौर पर पॉट पेंट करना पसंद है…और एक्चुअली अंकल मैं न उसे बनाता भी खुद ही हूँ, यह बताते हुए मैं अपने आप में बहुत पैशनेट साउंड कर रहा था। और फिर अंकल ने कहा, अच्छा, पर बेटी वो तो कुम्हारों वाला काम है न. मैंने तुरंत उनकी बात को काटा और धड़ाक से जवाब दिया। नहीं अंकल, कलाकारों वाला। Ooooo, kala..Aaa kar !
मैं थोड़ा खुश हो गया कि चलो अंकल समझ गयें। अब तो बस एक और सवाल, मेरा सॉलिड जवाब और फिर क्या Dhaki tiki, dhaki tiki, dhaki chiki…thaa। लेकिन एक कहावत है न, जो किसी ने कभी सुनी नहीं है कि Don’t underestimate the IQ of a common uncle. So, फिर क्या अंकल ने दाग डाला अपना लाख टके का Suggestion। बेटा रेलवे और बैंक में बहुत वैकैंसी है कोशिश करो, देखो कुछ हो जायेगा तो जिंदगी संवर जाएगी। इस बात पर चार चाचाओं ने गज़ेटेड अफसर की तरह अपनी मुहर लगा दी…और बोला सरकारी जॉब की तो शान ही कुछ और होती है। सेफ्टी, सिक्योरिटी, गारंटी और……. न जाने क्या क्या।

Aatm-Manthan: An Expert advice.

अंकल की बात सुन के दो मिनट के लिए बुरा लगा, फिर मन ही मन बोला की चलो कोई नहीं ये लोग नहीं समझेंगे …मेरे फील्ड के नहीं है न…उन्हें क्या पता बाहर कलाकारों की कितनी इज़्ज़त है। फिर मैं अपने लोगों के बीच पहुँचा। कलाकारों के बीच …नो नो नो …इज़्ज़तदार कलाकारों के बीच।
वैसे, आगे बढ़ने से पहले यह बताना ज़रूरी है कि मैं अब कलाकारों की दुनिया के सबसे स्टेबल प्रोफेशन एडवरटाइजिंग में आ गया था। बड़ा खुश था मैं …बहुत सी कहानियां सुन रखी थी इसके बारे में । सच का तो पता नहीं था but अच्छी थी सारी।

Pehla Nasha- A Myth.

पहला दिन मेरे नए प्यार का । कदम रखते साथ ही “मिले सुर मेरा तुम्हारा ” वाली Tune दिमाग में चलने लगी। अंदर पहुँचा तो देखा सभी लोगों अलग तरीके से कामचोरी में लगे थे । इस बारे में मैंने सुना था, इसे कूल Attitude कहते हैं, वैसे पंजाबी गाने ज्यादा हिट हैं तो अब इसे Swag भी कहते हैं। इसके पीछे और भी थ्योरी है कि क्रिएटिव हैं … जब मन करेगा तभी काम करेंगे। सो, जो सुना था वो दिखने लगा था और बड़ा खुश था मैं। फिर दिन गुजरे, कई रात गई : कई कॉफियां, कई बकचोदी और ब्रीफ। पहली बात तो यह है कि क्लाइंट आपकी क्रिएटिविटी की बहुत इज़्ज़त करता है, जब तक कि उसे कोई ज़रूरी काम न हो। जिस पल उसे जरूरत पड़ जाती है उस पल आप उनके लिए कलाकार से जादूगर बन जाते हैं। वैसे हैं भी,क्योंकि आपके पास फोटोशॉप जैसा सुलेमानी तलवार जो है।
मुझे लगता है कि इस गूगल और फोटोशॉप ने ही कलाकारों की इज़्ज़त ख़राब की है। इन्हें लगता है कि फोटोशॉप के पास ब्रेन भी होता है, अपना। और रातें काली करना सिर्फ़ हमारा पैशन है।

Rangmanch- A truth unveiled

खैर ग्लैमर और रेस्पेक्ट की तलाश जारी थी। पर्दा हट नहीं रहा था। पता भी नहीं चल रहा था और किसी से पूछ नहीं पा रहा था कि कहीं कोई पानी में सर डाल कर…निकालकर यह न बोल दे कि “दोबारा मत पूछना “। फिर एक दिन खबर मिली की पीयूष पांडे जी को पद्मश्री मिल रहा है। मैं खुश हो गया चलो इज़्ज़त है लेकिन किसकी, शायद उनकी जिन्होंने कम टेक्नोलॉजी में कमाल किया। क्योंकि गूगल तो आज की दुनिया का नया GOD है और हम सब उसके बन्दे माने जाते हैं। अब ऐसा है नहीं पर क्या करें गूगल कोई आकाशवाणी भी तो नहीं करता है और फोटोशॉप पर यकीन कुछ ज्यादा है। ग्लैमर और रेस्पेक्ट तो अब एक सफेद हाथी लगने लगा था, पता नहीं सुना तो था होता है पर दिखाई नहीं दे रहा था। शायद रात के अंधेरे में खो गया कहीं । But होप, आशा और उम्मीद बेचने वाले इंडस्ट्री का हिस्सा था यूँ हार नहीं मान सकता था।
तो आखिरकार एक दिन मुझे मिला गया वो…सिगरेट की कसमकश में उड़ता ग्लैमर, दारु की हर बूँद में बहता रेस्पेक्ट और इसके बाद भी कुछ बाकि था तो जिस दिन सर्विसिंग के कहने पर कॉपी चेंज हो गया और क्लाइंट के कहने पर आर्ट उस दिन लगा की हमसब रंगमंच की कठपुतली हैं जिसकी डोर – – – के पास है, सिर्फ मृत्यु ही एक मात्र सत्य है, कला का आकार होता है जो बदलता रहता है और ग्लैमर सिर्फ एक ब्लैक होल है।